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राजनीति- उत्तराखंड कॉंग्रेस में होगा बदलाव ?

उत्तराखण्ड

राजनीति- उत्तराखंड कॉंग्रेस में होगा बदलाव ?

उत्तराखंड के पहाड़ो में जिस तरह मौसम बदला करता है, उसी तरह पहाड़ी राज्य की राजनीति का हाल भी है, यहां कभी भी कुछ भी राजनीतिक हलचलें उठ जाती हैं

पिछले दिनों कुमाऊं से किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने संगठन पर गढ़वाल के साथ पक्षपात करने का बयान दिया और कहा कि प्रदेश संगठन द्वारा नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और उपनेता सदन तीनों कुमाऊं से चुने गए हैं, जबकि गढ़वाल में भी अनुभवी नेता एवं अधिक विधायक हैं- इतना नहीं यह तक कह डाला कि यदि कांग्रेस को लोकसभा चुनाव जीतना है तो प्रदेश संगठन को दिल्ली जाकर माफी मांगनी चाहिए, इसके बाद से ही कांग्रेस के अंदर चल रही राजनीतिक कलह चर्चा में आ गई, यही नहीं कांग्रेस के प्रीतम सिंह भी तिलकराज बेहड़ के द्वारा दिए गए बयान का समर्थन करते हुए नजर आए और उन्होंने कहा कि तिलकराज बेहड़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, उनकी बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और संगठन को इस पर विचार करना चाहिए।

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अब आम राजनीतिक चर्चाओं में यह बात चल रही है कि क्या कॉन्ग्रेस फिर एक बार कुछ बदलाव करेगी और तिलकराज बेहड़ की बात मानते हुए गढ़वाल से किसी को प्रदेश अध्यक्ष की कमान या नेता प्रतिपक्ष अथवा उप नेता सदन चुनेगी

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यदि हां तो वह आखिर कौन होगा जो संगठन हित में नाराज ना होकर अपने दायित्व का बलिदान देगा, क्योंकि राजनीति में वही व्यक्ति आता है जो महत्वकांक्षी हो

क्या यशपाल आर्य छोड़ेंगे नेता प्रतिपक्ष कि जिम्मेदारी, क्या लोकसभा चुनाव से पूर्व करन माहरा प्रदेश अध्यक्ष के दायित्व से हटाए जाएंगे, या युवा नेता भुवन कापड़ी अपने अनुभवी नेताओं के लिए अपने वर्तमान दायित्व का त्याग करेंगे

हालांकि अभी कांग्रेस के शीर्ष नेता और आए दिन सोशल मीडिया में कुछ ना कुछ अपने मन का उतार देने वाले हरीश रावत भी मौन नजर आ रहे हैं, या यूं कहें की इंतजार कर रहे हैं जब पूरी उत्तराखंड कांग्रेस फिर एक बार हरीश रावत के पास जाएं और निवेदन करें इस डैमेज कंट्रोल को किसी तरह बचाने में साथ आयें जो भी हो उत्तराखंड में कांग्रेस के हालात ठीक नजर नहीं आ रहे एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू करते हुए जगह-जगह बूथ स्तर तक बैठक शुरू कर दी हैं, मुख्यमंत्री स्वयं मंच पर चढ़कर लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुट चुके हैं वहीं कांग्रेस एक के बाद एक पार्टी के अंदरूनी बयानों के कारण बैकफुट पर है।

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